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Wednesday, February 15, 2012

0331

शबाब को शबाब की हद तक चाहता हूँ l
तू पत्थर ही सही पर तुझे खुदा मानता हूँ ll
कितना भी कर तू मुझे पहचानने से इनकार l
अफ़सोस इस शहर में बस तुझे ही जानता हूँ ll

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